Monday, August 21, 2017

Interview on great American Eclipse TSE on Etv. https://youtu.be/qEiPhUveS6o

Sunday, August 20, 2017

कल 21/8/ 2017 को पूरा अमेरिका खग्रास सूर्यग्रहण से ओतप्रोत हो जाएगा l पूरे विश्व भर से खगोल वैज्ञानिकों की नजर सूर्य के अभ्यास के लिए इस ग्रेट एक्लिप्स पर लगी हुई है l सूर्य ऊर्जा का विभिन्न तरंगों पर अभ्यास एवं कोरोना के अभ्यास के लिए यह सूर्य ग्रहण एक अत्यंत अच्छा मौका माना जाता है l आज गुरुदेव ऑब्जर्वेटरी पर etv के पत्रकार बंधु सूर्यग्रहण को लोगों तक पहुंचाने के लिए उपस्थित रहें l हम उनके कृतज्ञ है l

Saturday, August 19, 2017

पृथ्वी के 2/3 भाग में फैले हुए समुद्र पृथ्वी की नब्बे प्रतिशत गर्मी सोख लेते हैं l यह समुद्र पृथ्वी के क्लाइमेट चेंज में अपना सबसे अहम रोल निभाते हैं l1980 के बाद ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से समुद्र में गर्मी बढ़ रही है l यह तापमान अब तक 1.59f  बढ़ गया है l पिछले तीन दशक में समुद्र का तापमान अत्यंत तेजी से बढ़ रहा है l इसके चलते इस सदी के अंत तक समुद्र एक से चार फीट तक ऊंचे आ जाएंगे, साथ में समुद्री प्रवाह बदल जायेंगे l अत्यंत धुआं धार बारिश बढ़ेगी और विंड पैटर्न एवं तूफानी प्रवाह के बदलने के साथ सूखा भी बढ़ेगा l समुद्री जीवन में पलायन बढ़ेगा और पृथ्वी की क्लाइमेट अत्यंत खतरनाक मोड़ लेगी l देखते है ग्लोबल वार्मिंग और समुद्र का अत्यंत तेजी से बढ़ रहा तापमान क्या भविष्य निर्माण करेगा l दिव्य दर्शन पुरोहित, गुरुदेव ऑब्जर्वेटरी , गायत्री प्रज्ञापीठ ,करेली बाग ,वडोदरा l Image/Data credit: NASA,NOAA,EPO




युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने चालीसवें दशक में ही समुद्र की सतह की भयानक बढ़ोतरी के बारे में कह दिया था जो सच हो रहा है l समुद्र ग्लोबल वार्मिंग का 90 परसेंट तापमान अपने में सोख लेते हैं ,जिसके चलते समुद्र की सतह में बढ़ोतरी होती है l समुद्र पूरे विश्व की क्लाइमेट के लिए जिम्मेदार है l इसमें कोई भी बदलाव क्लाइमेट को चेंज कर देता है l उपग्रह बता रहे हैं कि पिछले 25 साल में 2.8 इंच की बढ़ोतरी के साथ में प्रति साल समंदर 3 सेंटीमीटर बढ़ रहे हैं l इसके साथ में उसके प्रवाह उलट-पुलट हो रहे हैं ,जो अल नीनो और ला नीना के लिए जिम्मेदार है l साथ में  बढ़ रहे  जवार भाटा भी समुद्र के प्रवाह को उलट-पुलट कर देते है ,जो सुनामी के लिए भी जिम्मेदार होते हैं l समुद्र का इस तरह से बढ़ने से हरिकेन ज्यादा उत्पन्न होते हैं , वैश्विक विंड पैटर्न भी बदल जाती है l यह चलता रहा तो अघोषित क्लाइमेट चेंज  के लिए हमें तैयार रहना पड़ेगा l संक्षिप्त में कह सकते हैं कि हम सब ने मिलकर के विश्व की भूगोल को ही बदल दिया है l इमेज एंड डाटा क्रेडिट : JPL / NASA / NOAA & Satellites.
युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने चालीसवें दशक में ही समुद्र की सतह की भयानक बढ़ोतरी के बारे में कह दिया था जो सच हो रहा है l समुद्र ग्लोबल वार्मिंग का 90 परसेंट तापमान अपने में सोख लेते हैं ,जिसके चलते समुद्र की सतह में बढ़ोतरी होती है l समुद्र पूरे विश्व की क्लाइमेट के लिए जिम्मेदार है l इसमें कोई भी बदलाव क्लाइमेट को चेंज कर देता है l उपग्रह बता रहे हैं कि पिछले 25 साल में 2.8 इंच की बढ़ोतरी के साथ में प्रति साल समंदर 3 सेंटीमीटर बढ़ रहे हैं l इसके साथ में उसके प्रवाह उलट-पुलट हो रहे हैं ,जो अल नीनो और ला नीना के लिए जिम्मेदार है l साथ में  बढ़ रहे  जवार भाटा भी समुद्र के प्रवाह को उलट-पुलट कर देते है ,जो सुनामी के लिए भी जिम्मेदार होते हैं l समुद्र का इस तरह से बढ़ने से हरिकेन ज्यादा उत्पन्न होते हैं , वैश्विक विंड पैटर्न भी बदल जाती है l यह चलता रहा तो अघोषित क्लाइमेट चेंज  के लिए हमें तैयार रहना पड़ेगा l संक्षिप्त में कह सकते हैं कि हम सब ने मिलकर के विश्व की भूगोल को ही बदल दिया है l इमेज एंड डाटा क्रेडिट : JPL / NASA / NOAA & Satellites.
The Sun silhouetted by cloud at 10:45 AM,IST on 19.08.2017,Saturday from Gurudev Observatory,Vadodara,India.  
गायत्री के देवता सूर्यनारयण के  प्रशांत स्वरुप का दर्शन  आज सुबह १०:४५ को गुरुदेव वेधशाला ,श्री गायत्री प्रज्ञापीठ,करेलीबग,वड़ोदरा से संभव हुआ। बादलो के चलते सूर्य के इस तत्सवितुर्वरेण्यं के भर्ग को खुली आँखों से बिना इंफ्रारेड व अल्ट्रावायलेट किरणों के भय  देखना  संभव हो सका। 


GURUDEV OBSERVATORY The Sun silhouetted by cloud at 10:45 AM,IST on 19.08.2017,Saturday from Gurudev Observatory,Vadodara,India. गायत्री के देवता सूर्यनारयण के प्रशांत स्वरुप का दर्शन आज सुबह १०:४५ को गुरुदेव वेधशाला ,श्री गायत्री प्रज्ञापीठ,करेलीबग,वड़ोदरा से संभव हुआ। बादलो के चलते सूर्य के इस तत्सवितुर्वरेण्यं के भर्ग को खुली आँखों से बिना इंफ्रारेड व अल्ट्रावायलेट किरणों के भय देखना संभव हो सका।